कुंए का मेढ़क



13 November 2014
17:41

एक कूएं  में दो मेढ़कों का परिवार रहता था | दोनों रिश्तेदार थे और एक दूसरे से जलते थे | एक दिन एक मेढ़क को चतुराई सूझी | उसने सोंचा क्यों न मैं सांप से दोस्ती कर लूं और उसे अपने कूआं में बुला लूं तो वह मेरे कूएं  के रिश्तेदार परिवार को खा लेगा | फिर पूरे कूएं में मेरा परिवार आराम से रहेगा |

बस फिर क्या था वह चतुर मेढ़क फुदक कर निकला कूएं  से बाहर और ले के आया एक सांप अपने कूआं में |
धीरे धीरे उस सांप ने एक एक कर के सब मेढ़क निगल लिया  सरल मेढ़क के परिवार का |

चतुर मेढ़क ने अब सांप को कुयें से बाहर जाने को कहा पर सांप राजी नहीं हुआ | सांप को आराम से भोजन करने की आदत हो चुकी थी | 

अब मेढ़क एक एक कर कर हर रोज चतुर मेढ़क के परिवार के सदस्यों को खाने लगा | 

चतुर मेढ़क का पुत्र और पत्नी भी खाए जा चुके थे | अब आनेवाले कल उसी चतुर मेढ़क  की बारी थी |

चतुर मेढ़क ने समझाया सांप को कि वह उसे कुयें से बाहर जाने दे | वह जाकर अपने दुसरे रिश्तेदारों को लायेगा |

सांप को चतुर मेढ़क की बात उचित लगी | वह  चतुर मेढ़क को कूएं से बाहर निकलने पर मना नहीं किया |

चतुर मेढ़क फुदक कर कुयें से बाहर निकला और कभी नहीं लौटा वापस अपने घर में |

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