बेइमानी का फल
रमन बहुत ईमानदार था । ईमानदारी के कारण उसे काम से निकाल दिया था ।
वह दुखी मन से घर लौट रहा था । रास्ते में उसे एक बूढ़ा आदमी मिला । वह तीन झोले ले कर चल रहा था ।
रमन को देख उस बूढ़े आदमी ने कहा - ‘ क्या तुम मेरा एक झोला उठा सकते हो ? मुझे पास के ही गाँव में जाना है ।’
‘ हाँ हाँ क्यों नहीं! ‘ रमन ने कहा और बूढ़े का झोला उसके हाथ से ले लिया ।
रमन आगे चल रहा था पीछे पीछे बूढ़ा । कुछ दूर चलने के बाद रमन ने पूछा आख़िर इस झोले में क्या है ?
बूढ़े ने कहा कि इसमें तांबे के सिक्के हैं ।
रास्ते में नदी पड़ी ।
रमन आगे बढ़ा पर बूढ़ा नदी के किनारे ही खड़ा रहा ।
रमन ने पानी में चलने को कहा तो बूढ़े ने कहा मैं इन दो झोलों के बोझ के साथ नदी नहीं पार कर सकता । अगर तुम मेरा दूसरा झोला पकड़ लो तो मैं आसानी से नदी पार कर लूँगा ।
रमन ने ख़ुशी ख़ुशी दूसरा झोला भी पकड़ लिया ।
बूढ़ा आसानी से नदी पार कर लिया ।
थोड़ी दूर चलने के बाद रमन ने पूछा कि अब इस झोले में क्या है ?
बूढ़े ने बताया कि इस झोले में चाँदी के सिक्के हैं ।
अब रमन और बूढ़ा दोनों आगे बढ़ चले ।
रमन के हाथ में दो झोले थे और बूढ़े के हाथ में एक झोला ।
रमन ने बूढ़े से कहा कि उसे झोला पकड़ा कर वे निश्चिंत रहें । वह झोला ले कर भागेगा नहीं । वह ईमानदार है । उसे अपनी ईमानदारी के कारण ही अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी ।
बूढ़ा मौन रहा ।
रास्ते में आगे चलने के बाद पहाड़ आया ।
पहाड़ पर रमन चढ़ने लगा ।
पलट के रमन ने देख बूढ़ा चढ़ ही नहीं रहा है पहाड़ पर ।
बूढ़े ने कहा रमन से कि उसका तीसरा झोला भी वो पकड़ ले तो उसे पहाड़ चढ़ने में आसानी होगी ।
रमन ने झोला पकड़ लिया ।
दोनों पहाड़ पर चढ़ने लगे ।
अबकी फिर रमन ने पूछा कि इस झोले में क्या है ?
बूढ़े ने कहा कि इस झोले में सोने के सिक्के हैं ।
कुछ देर पहाड़ की चढ़ाई के बाद रमन के मन में बेईमानी आ गयी ।
उसने सोंचा इन तीनों झोलों के साथ मैं भाग जाऊँ तो यह बुड्ढा आख़िर कर ही क्या लेगा ।
और रमन तीनों झोलों के साथ भाग गया ।
घर पहुँच के रमन ने झोला खोला तो पाया तीनों झोलों में पत्थर हैं ।
तीसरे झोले में एक कागज में लिखा था कि मैं इस देश का बूढ़ा राजा हूँ । मैं अपनी बेटी के लिये ईमानदार युवक की तलाश में निकला हूँ । मैं उस ईमानदार युवक से अपनी बेटी के शादी कर अपना राजपाट सौंपना चाहता हूँ ।
रमन अपने नसीब को कोसने लगा ।
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